“जो देरी पहले बदकिस्मती लगी, वही ज़िंदगी की सबसे बड़ी सौगात बन गई — एक चूक ने भूमि को उस भयावह हादसे का शिकार होने से बचा लिया जिसमें 241 लोगों की जान चली गई।”
✈️ 10 मिनट लेट हुई, और ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई
कुछ लोगों को सच में भगवान खास तौर पर बचा लेते हैं। अहमदाबाद की विनाशकारी फ्लाइट दुर्घटना में एक नाम ऐसा भी है जिसने मौत को बेहद करीब से देखा — और फिर चमत्कारिक रूप से बच गईं। ये नाम है भूमि चौहान।
दुख से शुरू हुई थी वो दोपहर…
भूमि चौहान अपने पति से मिलने लंदन जा रही थीं। फ्लाइट का समय था दोपहर 1:10 बजे, लेकिन ट्रैफिक में फंसने के कारण वह 10 मिनट देरी से सरदार वल्लभभाई पटेल एयरपोर्ट पहुंचीं। एयरलाइन की प्रक्रिया सख्त थी — इसलिए उन्हें बोर्डिंग पास नहीं दिया गया।
फ्लाइट छूट गई। वह बेहद निराश थीं। आंखों में आंसू और मन में गुस्सा — लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यही ‘देरी’ आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी कृपा साबित होगी।
और फिर मिली वो भयावह खबर…
जैसे ही वह एयरपोर्ट से बाहर निकलीं, उनके मोबाइल पर एक ब्रेकिंग न्यूज़ अलर्ट आया —
“एयर इंडिया की अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट टेकऑफ के कुछ मिनटों बाद ही दुर्घटनाग्रस्त — सभी 241 यात्रियों की मौत की आशंका।”
इस खबर को सुनते ही भूमि के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह सिहर उठीं। सदमे में चली गईं। वह वही फ्लाइट थी — जिसमें वह भी होतीं अगर वह 10 मिनट लेट न हुई होतीं।
“गणपति बप्पा ने बचा लिया मुझे” — भूमि चौहान
इस दर्दनाक अनुभव के बाद भूमि चौहान ने कहा:
“मुझे यकीन है कि यह मेरे भगवान गणपति की कृपा थी। मैं आज ज़िंदा हूं, बस उसी पल की वजह से, जो उस समय सबसे बुरा लग रहा था…”
📌- जहाँ एक तरफ यह हादसा पूरे देश को झकझोर गया, वहीं भूमि की कहानी उस भाग्य और आस्था की मिसाल बन गई, जो ज़िंदगी के सबसे अंधेरे मोड़ पर एक नई सुबह की किरण दे जाती है।
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🔹आचार्य सन्त कुमार भारद्वाज
Alok Kumar Srivastava serves as the Chief Editor of Prabhat Darshan, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering political affairs, social issues, and regional developments.
