देहरादून: 2013 की केदारनाथ त्रासदी के 12 साल बाद भी लापता हुए 3,075 लोगों का पता नहीं चल पाया है। इस दर्दनाक आपदा में अपनों को खोने वाले परिवारों की उम्मीद अभी भी ज़िंदा है। हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें सरकार से लापता लोगों के कंकालों की खोज करके उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने की अपील की गई है।
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सरकार ने अब तक किए हैं चार बार सर्च ऑपरेशन
राज्य सरकार ने इस आपदा के बाद से अब तक चार बार खोज अभियान चलाया है। इन अभियानों के दौरान कुछ कंकाल मिले हैं, जिनका डीएनए परीक्षण किया गया। हालांकि, बरामद किए गए कंकालों की संख्या लापता लोगों की संख्या से काफी कम है। सरकार ने पहले भी यह बताया था कि मलबे में दबे शवों को खोजने के लिए कोई विशेष तकनीक उपलब्ध नहीं है और मंदाकिनी घाटी में खुदाई करने से पर्यावरण को खतरा हो सकता है।
पीड़ित परिवारों की न्याय की गुहार
याचिका में कहा गया है कि सरकार को लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन करना चाहिए और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करना चाहिए। आपदा के कई साल बाद भी, कई परिवार अपने प्रियजनों के बारे में कोई जानकारी न मिलने से निराशा में हैं। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि लापता लोगों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार से उनके परिवारों को शांति मिल सकती है।
अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
उत्तराखंड हाईकोर्ट अब इस याचिका पर सुनवाई करेगा और सरकार से इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगेगा। पीड़ित परिवारों की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह उनके लिए न्याय और शांति की आखिरी उम्मीद है।

