Bath in Ganga वाराणसी। देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन आज पहली बार वाराणसी पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लगभग 25 साल पहले वह काशी आए थे और तब मांसाहारी जीवनशैली अपनाते थे। उन्होंने बताया कि गंगा में स्नान करने के बाद उन्होंने शाकाहारी जीवनशैली को अपनाया।उपराष्ट्रपति ने वाराणसी में नट्टुकोट्टई धर्मशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान और काशी की धार्मिक पवित्रता ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपराष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया।उपराष्ट्रपति आने वाले दिनों में बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे और काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के बाद धार्मिक नेताओं और संतों से मुलाकात करेंगे।
गंगा स्नान ने बदल दी जीवन शैली
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि लगभग 2000 वर्ष पूर्व जब वह यहां आए थे, तब वह मांस खाते थे। लेकिन गंगा नदी में पवित्र स्नान ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी और उन्हें शाकाहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उपराष्ट्रपति ने कहा, “यहां पर गंगा मइया में स्नान करने के बाद मैं शाकाहारी बन गया।” उनका यह कथन इस प्राचीन नगरी के आध्यात्मिक प्रभाव और गंगा की पावनता को दर्शाता है, जो न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि जीवन शैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने की शक्ति रखती है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया स्वागत, ‘नट्टुकोट्टई धर्मशाला’ का लोकार्पण
उपराष्ट्रपति के वाराणसी पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह जीत के बाद उपराष्ट्रपति का वाराणसी का पहला दौरा है।इस दौरान उन्होंने सिगरा क्षेत्र में नव-निर्मित 10 मंजिला ‘काशी नट्टुकोट्टई धर्मशाला’ (Satram Bhavan) का उद्घाटन भी किया। यह धर्मशाला दक्षिण भारतीय नागरथर समुदाय द्वारा बनवाई गई है और यह काशी तथा तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक बंधन को और मजबूत करती है। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक बताया। यह धर्मशाला श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त है।
बाबा विश्वनाथ के चौखट पर मत्था टेकेंगे
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अपनी काशी यात्रा के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन और बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक भी करेंगे। उनके इस दौरे को लेकर सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। उनका यह दौरा तमिलनाडु और काशी के गहरे आध्यात्मिक रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा।

