Uttarakhand Movement , देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन में मातृशक्ति ने जिस हिम्मत और धैर्य का परिचय दिया, वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। महिलाएं गोद में बच्चों को लेकर सड़कों पर उतरीं, धरनों में शामिल हुईं और राज्य के अस्तित्व के लिए हर संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं।
मातृशक्ति के त्याग और साहस से मिला उत्तराखंड को अस्तित्व
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान गांव-गांव की महिलाएं, चाहे वह किसान परिवार से हों या शिक्षिका, सबने इस आंदोलन को जनांदोलन बना दिया। कई स्थानों पर महिलाओं ने पुलिस की लाठियां खाईं, गिरफ्तारी दी, लेकिन आंदोलन से पीछे नहीं हटीं। देहरादून, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, टिहरी और नैनीताल में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने राज्य निर्माण की नींव मजबूत की।
मुख्यमंत्री धामी ने किया भावनात्मक संबोधन
राज्य स्थापना दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “उत्तराखंड आंदोलन में महिलाओं की भूमिका अतुलनीय रही है। उनके संघर्ष, त्याग और बलिदान के बिना यह राज्य बनना संभव नहीं था। मैं उन सभी मातृशक्ति को नमन करता हूं जिन्होंने उत्तराखंड की पहचान को गढ़ने में अपनी भागीदारी दी।”
राज्य की प्रगति में भी महिलाओं की अहम भूमिका
आज उत्तराखंड की महिलाएं केवल आंदोलन का हिस्सा नहीं, बल्कि विकास की दिशा भी तय कर रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, सेना और खेल—हर क्षेत्र में मातृशक्ति अग्रणी भूमिका निभा रही है। सरकार भी ‘महिला सशक्तिकरण’ को प्राथमिकता देते हुए स्वरोजगार, महिला समूहों और योजनाओं को बढ़ावा दे रही है।

