नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव रखा है कि दिल्ली का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ होना चाहिए। सांसद का तर्क है कि यह शहर पौराणिक काल से पांडवों की राजधानी रहा है और इसकी पहचान भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी है।
गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र
भाजपा सांसद ने अपने पत्र में लिखा कि वर्तमान दिल्ली का भू-भाग वही है, जिसे महाभारत काल में ‘इंद्रप्रस्थ’ कहा जाता था। उन्होंने आग्रह किया कि देश की राजधानी को उसके मूल और ऐतिहासिक नाम से जोड़ा जाए। साथ ही सांसद ने सुझाव दिया कि दिल्ली के प्रमुख स्थलों — जैसे रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और मेट्रो स्टेशनों — का नाम भी ‘इंद्रप्रस्थ’ से जोड़ा जाए।
सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी पहल
सांसद ने कहा कि भारत के कई शहरों ने अपने प्राचीन नाम वापस अपनाकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित किया है। जैसे प्रयागराज, अयोध्या और वाराणसी की तरह, दिल्ली को भी उसका ऐतिहासिक नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ लौटाना चाहिए। यह कदम देश की परंपरा, इतिहास और गौरवशाली अतीत से युवाओं को जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
भाजपा सांसद की इस मांग पर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ नेता इसे सांस्कृतिक सम्मान का कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक मुद्दा मान रहे हैं। हालांकि आम जनता में भी इस विषय को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
दिल्ली का पौराणिक महत्व
महाभारत काल में पांडवों की राजधानी ‘इंद्रप्रस्थ’ यमुना नदी के किनारे बसाई गई थी। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि आज का पुराना किला क्षेत्र उसी प्राचीन नगर के अवशेषों पर बसा हुआ है। इसलिए कई इतिहासकार भी मानते हैं कि ‘दिल्ली’ का असली नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ ही रहा है।

