नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान पर जहां कुछ राज्यों ने आपत्ति जताई है, वहीं तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने काम की रफ्तार में बाकी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। विरोध के बावजूद दोनों राज्यों में मतदाता गणना फार्मों के वितरण में तेजी देखने को मिल रही है।
तमिलनाडु और बंगाल में तेज रफ्तार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक लगभग 88 प्रतिशत गणना फार्म और तमिलनाडु में 78 प्रतिशत से अधिक फार्म बांटे जा चुके हैं। इन राज्यों में निर्वाचन आयोग की टीमें घर-घर जाकर नए मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित कर रही हैं।
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यूपी और मध्य प्रदेश में धीमी प्रगति
इसके मुकाबले उत्तर प्रदेश में अब तक सिर्फ 69 प्रतिशत फार्म ही बांटे गए हैं, जबकि मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा और कम, 53 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में फॉर्म वितरण और सत्यापन कार्य में कर्मचारियों की कमी और मौसम संबंधी बाधाओं की वजह से रफ्तार धीमी रही है।
दूसरे चरण में सबसे पीछे केरल
देश के जिन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का दूसरा चरण शुरू हो चुका है, उनमें केरल सबसे पीछे चल रहा है। अब तक वहां केवल 49 प्रतिशत गणना फार्म ही बांटे जा सके हैं।
निर्वाचन आयोग ने दी सख्त हिदायत
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि गणना फार्म वितरण और सत्यापन कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि मतदाता सूची को अद्यतन किया जा सके। आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखना लोकतंत्र की मूलभूत आवश्यकता है।

