नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की ओर से राफेल फाइटर जेट को लेकर फेक कैंपेन चलाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह खुलासा यूएस–चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी दूतावास ने पाकिस्तान द्वारा राफेल जेट गिराए जाने से जुड़ी झूठी खबरें फैलाकर एक संगठित दुष्प्रचार अभियान चलाया था।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक,
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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह भ्रम फैलाने की कोशिश की कि पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना का राफेल फाइटर जेट मार गिराया है।
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इस फेक प्रोपेगैंडा का उद्देश्य राफेल पर जनता की विश्वसनीयता कम करना था।
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रिपोर्ट के अनुसार यह दुष्प्रचार इसलिए फैलाया गया ताकि चीन अपने J-35 फाइटर जेट को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा दे सके और राफेल की लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाया जा सके।
चीन का मकसद क्या था?
रिपोर्ट का दावा है कि चीन का प्रयास था—
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राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट की छवि खराब की जाए,
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पाकिस्तान और चीन समर्थित सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए फेक खबरों को बढ़ावा दिया जाए,
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और इसके बाद वैश्विक रक्षा बाजार में J-35 फाइटर जेट को एक बेहतर विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
भारत के लिए क्या मायने?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल ने अपनी उच्च क्षमता का प्रदर्शन किया था। ऐसे में चीन का यह प्रोपेगैंडा अभियान बताता है कि भारतीय वायु शक्ति और राफेल की बढ़ती प्रतिष्ठा से प्रतिद्वंद्वी देश किस स्तर तक रणनीतिक दुष्प्रचार अपना सकते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न केवल भारतीय वायुसेना की क्षमता पर भरोसा दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भविष्य में सूचना युद्ध (Information Warfare) रक्षा रणनीति का बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है।

