लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रयासों से वर्ष 2025 में संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित दिव्य, भव्य और स्वच्छ कुंभ को दुनिया भर में सराहना मिली थी। इसकी अद्भुत सफलता को देखते हुए यूनेस्को ने कुंभ को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ का दर्जा देकर भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर सम्मानित किया है।
अब इसी भव्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संगम नगरी माघ मेला 2026 की तैयारियों में जुट गई है। आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह महा समागम 3 जनवरी 2026 से शुरू होने जा रहा है।
माघ मेला 2026 की तैयारियों में तेजी
कुंभ की ऐतिहासिक सफलता के बाद प्रशासन इस बार भी माघ मेले को विशेष और अविस्मरणीय बनाने में जुटा है। अनुमान है कि इस बार देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर होगी।
पर्यटन विभाग ने की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप
बढ़ती भीड़ के अनुमान को देखते हुए पर्यटन विभाग ने इस बार विशेष व्यवस्थाएं की हैं—
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नए पर्यटन मार्ग और सूचना केंद्र स्थापित
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संगम क्षेत्र में स्वच्छता और सुरक्षा पर फोकस
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विदेशी पर्यटकों के लिए गाइड और हेल्पडेस्क
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आवागमन के लिए शटल बस और पार्किंग व्यवस्था
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मेले में डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा
पर्यटन विभाग का कहना है कि इस बार का माघ मेला “सुविधा, सुरक्षा और संस्कृति” की त्रिवेणी के रूप में आयोजित किया जाएगा।
कुंभ को मिला वैश्विक सम्मान
2025 के कुंभ को जिस प्रकार विश्व स्तर पर सराहा गया, उसने भारतीय संस्कृति को नई पहचान दिलाई।
– यूनेस्को द्वारा दी गई मान्यता ने आयोजकों का मनोबल बढ़ाया है।
– सरकार का लक्ष्य है कि माघ मेला 2026 भी वैश्विक स्तर का आयोजन बने।
श्रद्धालुओं में उत्साह
माघ मेला शुरू होने में अभी समय है, लेकिन श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों में उत्साह चरम पर है।
लोग सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित मेले की उम्मीद कर रहे हैं।

