नई दिल्ली। देश के मेट्रो शहरों से लेकर कस्बों, छोटे शहरों और दूर-दराज के गांवों तक इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और शांत प्रोसेस जारी है—स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)। यह प्रक्रिया भले ही हर साल निर्वाचन आयोग की रूटीन गतिविधि के रूप में चलती हो, लेकिन इस बार यह अचानक पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है।
एसआईआर का मुख्य उद्देश्य है कि भारत की मतदाता सूची (Electoral Roll) को पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित रखा जाए। यह कार्य लोकतंत्र की सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जाता है। जैसे-जैसे आगामी चुनावों की आहट बढ़ रही है, निर्वाचन आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की रफ्तार तेज कर चुका है।
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लेकिन इस बार SIR ने केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। कई राजनीतिक पार्टियों ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों की आशंका जताते हुए इसे लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। पार्टियों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी छोटी गलती का असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
इस बीच नागरिकों में भी उत्सुकता बढ़ी है कि आखिर भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में मतदाता सूची को सही, अपडेटेड और पारदर्शी कैसे रखा जाता है?
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कौन पुराने नाम हटाता है?
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नए मतदाताओं को कैसे जोड़ा जाता है?
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बीएलओ कैसे काम करते हैं?

