नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं की थी बल्कि आर्थिक रूप से भी स्ट्राइक को अंजाम दिया था। भारत ने अपने एयरस्पेस में पाकिस्तान के विमानों की एंट्री पर बैन लगा दिया था। इसके लिए भारत सरकार ने नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) भी जारी किया था। पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के करीब 3 महीने बाद भी पाकिस्तान को राहत नहीं मिल पाई है। भारत ने अपने एयरस्पेस में पाकिस्तानी विमानों की एंट्री पर बैन को और आगे बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
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कब तक के लिए बढ़ाया गया बैन?
भारत के नागरिक उड्डयन और सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर माहोल ने इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट कर के कहा- “हवाई क्षेत्र प्रतिबंध पर अपडेट, पाकिस्तानी विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) को आधिकारिक तौर पर 23 अगस्त 2025 तक बढ़ा दिया गया है। यह विस्तार निरंतर रणनीतिक विचारों को दर्शाता है और मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप है। आगे की अपडेट के लिए बने रहें।”
भारत-पाक सीमा पर वायुसेना का अभ्यास
23 से लेकर 25 जुलाई 2025 तक भारतीय वायुसेना राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बड़ा अभ्यास करने जा रही है। इसके लिए भी नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) को जारी कर दिया गया है। आपको बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल से राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्री गंगानगर जिलों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, पाकिस्तान के सभी हमलों को विफल कर दिया गया था।
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आतंकी हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक क्या-क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर करीब 26 सैलानियों की हत्या कर दी थी। इस आतंकी हमले के जवाब में भारत के सशस्त्र बलों ने मिसाइल और ड्रोन दागकर पाकिस्तानी आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया था। सेना के इस अभियान को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया था। आतंकियों पर हमले से बौखलाई पाकिस्तान की सेना ने भारत पर हमले की कोशिश की और सैकड़ों ड्रोन, मिसाइल दागे और लड़ाकू विमान भी भेजे। लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी हमलों को विफल कर दिया। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई विमानों और एयरबेस को बुरी तरह से तबाह कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने सीजफायर की गुजारिश की जिसके बाद संघर्ष रुका। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान के 100 से ज्यादा आतंकी और बड़ी संख्या में सैन्य बलों के जवान और अधिकारी भी मारे गए थे।

