Ayodhya Panchkosi Parikrama , अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में इस बार पंचकोसी परिक्रमा में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने लेट-लेटकर परिक्रमा पूरी की। कहीं पिता अपने छोटे बेटे को कंधे पर बिठाए चल रहा था, तो कहीं बहू अपनी 80 वर्षीय सास को साथ लेकर भक्ति में लीन थी। इस साल करीब 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंचकोसी परिक्रमा में भाग लिया, जिससे पूरा अयोध्या भक्तिमय माहौल में डूब गया।

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लेट-लेटकर परिक्रमा से झलकती अटूट आस्था

राम भक्तों ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी असीम श्रद्धा व्यक्त करने के लिए लेट-लेटकर परिक्रमा की। भक्तों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और समर्पण का प्रतीक है। कई श्रद्धालु दूर-दराज के राज्यों से पैदल यात्रा कर अयोध्या पहुंचे और पंचकोसी मार्ग पर लेट-लेटकर भगवान को नमन किया।

परिवारों ने भी निभाई आस्था की परंपरा

इस परिक्रमा में परिवारों का समर्पण भी देखने को मिला। एक पिता अपने बेटे को कंधे पर बिठाए चल रहा था ताकि छोटा बालक भी परिक्रमा का पुण्य प्राप्त कर सके। वहीं, एक बहू अपनी बुजुर्ग सास का हाथ पकड़कर पूरी परिक्रमा कराती नजर आई। इन दृश्यों ने हर भक्त का मन भावविभोर कर दिया।

शहर में उमड़ा भक्तों का सैलाब, प्रशासन सतर्क

करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने से अयोध्या की सड़कों पर आस्था की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर और पानी के स्टॉल लगाए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

राम नगरी में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

पूरी परिक्रमा के दौरान ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से अयोध्या की गलियां गूंज उठीं। भक्तों का उत्साह चरम पर रहा। मंदिरों में भजन-कीर्तन और दीपों की रौशनी ने माहौल को और भी पावन बना दिया।

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Alok Kumar Srivastava
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