भीखी। प्रसिद्ध साहित्यकार हरभगवान भीखी की पहली पुस्तक ‘चुप दे सुआल’ का आज लोकार्पण किया गया। यह आयोजन भीखी में डी.पी.ओ. और पंचायत दफ्तर को हटाने के विरोध में चल रहे धरना स्थल पर किया गया, जिसने इस साहित्यिक कार्यक्रम को सामाजिक संघर्ष से जोड़ते हुए एक विशेष महत्व प्रदान किया।

गौरतलब है कि हरभगवान भीखी इससे पहले शहीद बलदेव सिंह मान, शहीद अमर सिंह अच्रवाल और कामरेड जीता कौर जैसे महान कवियों के काव्य-संपादन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। अब उन्होंने अपने लेखन की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए यह पुस्तक जनमानस को समर्पित की है।

पुस्तक विमोचन के अवसर पर मास्टर छजु राम ऋषि ने कहा,

“पुस्तकें केवल बंद कमरों की शोभा न बनें, बल्कि उन्हें संघर्ष और जनचेतना के बीच ले जाना चाहिए। ‘चुप दे सुआल’ इसी सोच का प्रतीक है।”

इस अवसर पर करनैल भीखी, भोला सिंह समाओं, रुप सिंह ढिल्लों, गुलाब खीवा, भुरा सिंह और दिनेश सोनी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता व साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

धरना स्थल पर पुस्तक विमोचन के माध्यम से जहां साहित्य को जनसंघर्षों से जोड़ा गया, वहीं हरभगवान भीखी की लेखनी को भी एक नई पहचान मिली।

— परमजीत शर्मा, संवाददाता
स्थान: भीखी

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