नई दिल्ली। दिल्ली लाल किला कार बम धमाके से जुड़े आरोपियों को कथित रूप से पनाह देने के मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के कुलपति पर हुई कार्रवाई को लेकर राजनीति गरमा गई है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी द्वारा इसे मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताए जाने के बाद भाजपा ने उन पर तीखा पलटवार किया है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि किसी भी कानूनी कार्रवाई को धर्म से जोड़कर देखना गलत और भ्रामक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे मामलों को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। पूनावाला ने कहा कि भारत में हर समुदाय को संवैधानिक अधिकार मिले हुए हैं और देश की शीर्ष constitutional संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम समुदाय के लोग भी काम कर चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई किसी भी जांच का उद्देश्य केवल कानून और व्यवस्था को बनाए रखना है। इसे किसी समुदाय के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश करना न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश माना जाएगा।
मामले पर भाजपा का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े किसी भी आरोप की जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर करनी चाहिए, न कि उसे धार्मिक चश्मे से देखने की। वहीं, अरशद मदनी के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
फिलहाल जांच एजेंसियाँ मामले से जुड़े पहलुओं की गहन समीक्षा कर रही हैं, और सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह किसी भी समुदाय या संस्था से संबंधित क्यों न हो।
