Creamy Layer Reservation : नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने रिटायरमेंट से पहले आरक्षण और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने SC/ST आरक्षण में सब-क्लासिफिकेशन की वकालत की ताकि वास्तविक जरूरतमंद वर्ग को लाभ मिल सके। इसके अलावा, उन्होंने क्रीमी लेयर की पहचान और नीति निर्धारण पर जोर दिया, और कहा कि इस दिशा में जिम्मेदारी सरकार की है।

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SC/ST आरक्षण में सब-क्लासिफिकेशन की जरूरत

CJI गवई ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का लाभ सभी पात्र लोगों तक सही ढंग से पहुंचे, इसके लिए सब-क्लासिफिकेशन महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि क्रीमी लेयर की पहचान करके सरकार को नीति बनानी चाहिए ताकि समाज के वास्तव में पिछड़े वर्ग को लाभ दिया जा सके।

उनके अनुसार:

  • सभी SC/ST वर्ग समान स्थिति में नहीं हैं

  • कुछ वर्ग आर्थिक रूप से सक्षम हो गए हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए

  • नीति में सुधार से समाज में न्याय सुनिश्चित होगा

क्रीमी लेयर की पहचान और नीति

CJI ने यह भी कहा कि क्रीमी लेयर को पहचानना और उसका डाटा तैयार करना आवश्यक है। इसके बाद सरकार इस आधार पर नीति निर्माण कर सकती है। न्यायमूर्ति गवई का मानना है कि बिना स्पष्ट नीति के आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक नहीं पहुँच पाता। उन्होंने कहा:
“क्रीमी लेयर की पहचान और नियम बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। न्यायपालिका इस दिशा में केवल मार्गदर्शन दे सकती है।”

रिटायरमेंट के बाद सामाजिक कार्यों में योगदान

बीआर गवई ने अपने रिटायरमेंट के बाद सामाजिक कार्यों और शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने की योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि न्यायपालिका की सेवा के बाद वे समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम करना चाहते हैं।

न्यायपालिका और कॉलेजियम की स्वतंत्रता पर विचार

CJI गवई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कॉलेजियम सिस्टम की अहमियत पर भी टिप्पणी की। उनका मानना है कि स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की नींव है और इसके निर्णय समाज में न्याय सुनिश्चित करते हैं।

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Alok Kumar Srivastava
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