नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुंडई i20 कार में हुए आत्मघाती धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। हमले में मारा गया आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद घटना से करीब दो सप्ताह पहले पुलवामा के कोइल गांव में अपने घर गया था। यहां उसने अपने दो मोबाइलों में से एक अपने भाई जहूर इलाही को देते हुए कहा था— “अगर मेरी कोई खबर आए तो इसे पानी में फेंक देना।”
तालाब से मिला फोन, वीडियो में ‘शहादत ऑपरेशन’ की बात
जहूर ने पूछताछ में बताया कि उमर ने 26 से 29 अक्टूबर के बीच उसे यह फोन दिया था। 9 नवंबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी से उमर के साथियों की गिरफ्तारी की खबर आते ही वह घबरा गया और फोन को घर के पास बने तालाब में फेंक दिया।
बाद में जांच एजेंसियों ने तालाब से फोन बरामद किया। पानी में डूबने से फोन खराब हो चुका था, लेकिन डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने उससे एक महत्वपूर्ण वीडियो रिकवर किया। इस वीडियो में उमर अपने आत्मघाती हमले को ‘शहादत का ऑपरेशन’ कहकर प्रचारित कर रहा है।
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फोन की आखिरी लोकेशन दी थी सुराग
पहले जांच में उमर के दोनों फोन बंद मिले थे। एक की आखिरी लोकेशन दिल्ली, जबकि दूसरे की पुलवामा की थी। इसी दौरान जहूर से पूछताछ जारी थी कि इसी बीच दिल्ली में कार ब्लास्ट की घटना सामने आई। बरामद फोन व अन्य डिजिटल सबूत NIA को सौंप दिए गए हैं।
15 मौतें, 20 से ज्यादा घायल – 8 आरोपी गिरफ्तार
10 नवंबर को हुए इस आत्मघाती धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें 5 डॉक्टर शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल में “व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क” की भूमिका थी, जिसमें उच्च शिक्षित लोग शामिल थे।

