Devuthani Ekadashi नई दिल्ली/वाराणसी: आज, 1 नवंबर 2025 को हिन्दू पंचांग के अनुसार देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन को ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ और अबूझ मुहूर्त माना जाता है। हिन्दू धर्म में इसे वर्ष का पहला विवाह मुहूर्त भी कहा जाता है। इस अवसर पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवता अपने शयन से जागते हैं और धरती पर जीवन ऊर्जा का संचार होता है।

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देवउठनी एकादशी का महत्व

देवउठनी एकादशी को पौराणिक कथाओं में विशेष स्थान प्राप्त है। कहा जाता है कि इस दिन तुलसी और भगवान शालग्राम का विवाह हुआ था। इसलिए इसे विवाह और नए कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से व्रत रखने और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है।

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन किए गए कार्य में विशेष प्रभाव होता है और यह सालभर के सभी कार्यों की सफलता का प्रतीक माना जाता है।

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शादियों का सीजन शुरू

देवउठनी एकादशी के साथ ही हिन्दू समाज में शादी और अन्य शुभ अवसरों का सीजन शुरू हो जाता है। इस वर्ष 2025 में अभी 17 शुभ मुहूर्त शादियों के लिए बचे हैं। लोग इस अवसर पर बिना किसी बाधा या अशुभ समय देखे भी विवाह कर सकते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन विवाह करना न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ होता है बल्कि परिवारिक और सामाजिक जीवन में भी इसे सफलता का प्रतीक माना जाता है।

2026 में शादियों के मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगले वर्ष 2026 में शादियों का शुभ मुहूर्त फरवरी से शुरू होंगे। वर्षभर में कुल 59 विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जो कि पारिवारिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह के लिए मुहूर्त का चयन करने से पहले पक्ष-पात, नक्षत्र और तिथि का ध्यान रखना चाहिए। देवउठनी एकादशी जैसे अवसर पर मुहूर्त देखना वैकल्पिक होता है, क्योंकि इसे विशेष रूप से अबूझ और अत्यंत शुभ माना जाता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

देवउठनी एकादशी केवल विवाह का अवसर नहीं है, बल्कि इसे धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और तुलसी विवाह का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन भक्त तुलसी के पौधे और शालग्राम के साथ पूजन करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन की पूजा से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और धार्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

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Alok Kumar Srivastava
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