नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका को अद्वितीय और अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि संसद अध्यक्ष को बोलने का अवसर भले ही कम मिलता हो, लेकिन उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी दूसरों की बात सुनना और यह सुनिश्चित करना होती है कि सदन में सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष लोकतंत्र की मर्यादा और गरिमा के संरक्षक होते हैं।
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पीएम मोदी ने धैर्य को अध्यक्षों का सबसे महत्वपूर्ण गुण बताते हुए कहा कि वे शोर मचाने वाले और अति उत्साही सांसदों को भी मुस्कुराते हुए संभाल लेते हैं। यही धैर्य और संतुलन संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत संसद और निष्पक्ष पीठासीन अधिकारियों की भूमिका बेहद जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय परंपराओं, अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
