मिर्जापुर/वाराणसी: भारतीय शास्त्रीय संगीत के मूर्धन्य गायक और बनारस घराने के प्रमुख स्तंभ पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मिर्जापुर स्थित अपनी बेटी नम्रता मिश्र के आवास पर अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

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उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है, जिनके लिए पंडित जी ने 2014 लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट से प्रस्तावक की भूमिका निभाई थी।

बेटी के घर ली अंतिम सांस, काशी में होगा अंतिम संस्कार

जानकारी के मुताबिक, पंडित छन्नूलाल मिश्र को कुछ सप्ताह पहले माइनर अटैक आने के बाद वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर डॉक्टर्स की सलाह पर उनकी बेटी उन्हें मिर्जापुर स्थित अपने आवास पर ले आई थीं, जहाँ वे डॉक्टरों की निगरानी में थे। गुरुवार भोर करीब 4:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर वाराणसी ले जाया जाएगा और आज शाम मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

‘सांस अलबेली’ से PM मोदी के प्रस्तावक तक

पंडित छन्नूलाल मिश्र को खयाल, ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती और भजन जैसी उप-शास्त्रीय विधाओं में महारत हासिल थी। उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश में ठुमरी गायन की ‘बनारस अंग’ शैली को पुनर्जीवित करने का श्रेय दिया जाता है।

  • पुरस्कार: उन्हें वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में पद्म भूषण और 2020 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
  • PM मोदी से संबंध: शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के उनके अमूल्य योगदान और वाराणसी से उनके गहरे लगाव के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 2014 के आम चुनाव में अपनी उम्मीदवारी का प्रस्तावक बनाया था।

पंडित जी का जाना भारतीय संगीत परंपरा के एक युग का अंत माना जा रहा है।

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Alok Kumar Srivastava
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