प्रयागराज। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट पर आयोजित माघ मेला–2026 में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह 9 बजे तक ही करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी स्नान पर्व पर संगम में आस्था की डुबकी लगा ली। श्रद्धालुओं के स्वागत में हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई, जिससे संगम क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
इसी बीच मौनी अमावस्या पर राजसी स्नान की तर्ज पर जुलूस निकालने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को पुलिस ने संगम पहुंचने से पहले ही रोक दिया। प्रशासन ने 17/18 जनवरी की रात 12 बजे से मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर रखा है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि रथ के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए उसे आगे जाने से रोका गया।
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रथ रोके जाने के बाद शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस पर संतों से मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पैदल संगम जाने का अनुरोध किया था, लेकिन दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ से भगदड़ की आशंका बन जाती है। इसी दौरान सूचना मिली कि संगम क्षेत्र के पुल नंबर चार का बैरियर टूट गया है, जिसको लेकर आरोप लगाया गया कि यह शंकराचार्य के समर्थकों द्वारा तोड़ा गया।
स्थिति संभालने के लिए पुलिस ने किया डायवर्जन
संगम क्षेत्र में हंगामे के चलते पुलिस को भीड़ डायवर्ट करनी पड़ी। आरएएफ की मदद से श्रद्धालुओं को कतारबद्ध कर दूसरे मार्गों से भेजा गया। पुलिस और शंकराचार्य समर्थकों के बीच बहस की सूचना पर बड़ी संख्या में अधिकारी मौके पर पहुंचे। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मेलाधिकारी ऋषिराज समेत कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है और अधिकतम पांच लोगों के साथ ही स्नान किया जा सकता है। इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति जताते हुए प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया।
तड़के चार बजे से जारी है स्नान
माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज मनाया जा रहा है। ब्रह्म मुहूर्त में तड़के चार बजे से स्नान शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहेगा। प्रशासन के अनुमान के अनुसार इस वर्ष तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए संगम पहुंच सकते हैं।
एक दिन पहले से ही उमड़ने लगी थी भीड़
मौनी अमावस्या से एक दिन पहले ही संगमनगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचने लगी थी। अलसुबह से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शाम तक और तेज हो गया। हालात ऐसे थे मानो शनिवार को ही मौनी अमावस्या हो। प्रशासन का दावा है कि शनिवार शाम छह बजे तक करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे, जबकि रविवार को साढ़े तीन से चार करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

