नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को कहा कि युद्ध किसी दुश्मन के शव या कटे हुए अंग देखकर संतोष पाने के लिए नहीं लड़े जाते, बल्कि राष्ट्र की इच्छाशक्ति और मनोबल को स्थापित करने के लिए लड़े जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम साइकोपैथ नहीं हैं। लड़ाइयों का उद्देश्य दुश्मन के मनोबल को तोड़ना होता है, ताकि वह हमारी शर्तों पर आत्मसमर्पण करे और हम अपने राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल कर सकें।”
अजीत डोभाल नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी व्यक्तिगत इच्छाशक्ति को मजबूत करें, क्योंकि यही इच्छाशक्ति आगे चलकर राष्ट्रीय शक्ति का रूप लेती है।
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डोभाल ने कहा कि आज दुनिया में हो रहे युद्ध और संघर्ष इस बात का प्रमाण हैं कि कुछ देश अपनी इच्छा दूसरों पर थोपने के लिए ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश इतना शक्तिशाली हो जाए कि उसका कोई विरोध न कर सके, तो वह स्वतंत्र बना रहता है, लेकिन केवल संसाधन और हथियार होने से कुछ नहीं होता, यदि राष्ट्र का मनोबल कमजोर हो।
उन्होंने नेतृत्व के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मनोबल बनाए रखने के लिए मजबूत लीडरशिप जरूरी होती है। भारत इस मामले में सौभाग्यशाली है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने बीते दस वर्षों में देश को नई दिशा और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
NSA डोभाल ने भारत के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का स्वतंत्र भारत यूं ही नहीं बना। इसके लिए हमारे पूर्वजों ने अपार बलिदान दिए, अपमान और बेबसी के दौर से गुजरे, गांव जलाए गए और कई लोगों को फांसी तक दी गई। उन्होंने कहा कि यह इतिहास आज के युवाओं को एक चुनौती देता है।
अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि भारत के हर युवा के भीतर एक आग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “बदला” शब्द भले ही कठोर लगे, लेकिन यह एक शक्तिशाली भावना है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना है, देश को उस मुकाम पर वापस ले जाना है, जहां हम अपने अधिकारों, विचारों और विश्वास के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें।
उन्होंने भारतीय सभ्यता की विशेषताओं पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी सभ्यता कभी आक्रामक नहीं रही। हमने न तो किसी के मंदिर तोड़े, न लूटपाट की और न ही दूसरों पर हमला किया, लेकिन हम अपनी सुरक्षा और भविष्य के खतरों को समय पर समझने में कई बार चूक गए। डोभाल ने युवाओं से इन गलतियों से सबक लेने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

