Operation Sindoor Dharma Yudh सतना, मध्यप्रदेश: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को अपने गृह जिले सतना पहुंचे। वे यहां 53 साल बाद अपने बचपन के स्कूल सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से भावनात्मक बातचीत की।
Colonel Sophia : कर्नल सोफिया का बड़ा बयान ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक
बचपन की यादों में लौटे आर्मी चीफ
जनरल द्विवेदी ने अपने स्कूल पहुंचकर पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा कि यह वही जगह है जहाँ से अनुशासन, जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना का बीज उनके भीतर पड़ा। उन्होंने अपने शिक्षकों को श्रद्धांजलि दी और कहा,
“मैं जो आज हूँ, उसमें मेरे स्कूल की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान है।”
“हमने कभी नमाज के वक्त हमला नहीं किया” — आर्मी चीफ
सतना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर धर्म युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना हमेशा धार्मिक आस्था और मानवता का सम्मान करती है। उन्होंने कहा,
“हमने कभी नमाज के वक्त हमला नहीं किया। हमारी सेना केवल दुश्मन के खिलाफ है, किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं। हम धर्म की मर्यादा और मानवता की रक्षा के लिए लड़ते हैं।”
ऑपरेशन सिंदूर धर्म युद्ध जारी रहेगा
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना का अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर धर्म युद्ध’ आगे भी जारी रहेगा। इसका उद्देश्य सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ आतंकवाद, घुसपैठ और किसी भी प्रकार की आंतरिक चुनौती का मजबूती से सामना करना है। उन्होंने कहा कि भारत की सेना “कर्तव्य, धर्म और देश” के सिद्धांतों पर काम करती है।
युवाओं को संदेश — “देश पहले, मैं बाद में”
अपने स्कूल के छात्रों को संबोधित करते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि हर भारतीय युवा को यह संकल्प लेना चाहिए कि देश की सेवा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा,
“देश पहले, मैं बाद में — यही भारतीय सैनिक का मूलमंत्र है। चाहे आप किसी भी पेशे में जाएँ, देश के प्रति निष्ठा बनी रहनी चाहिए।”
सतना में गूंजे ‘भारत माता की जय’ के नारे
आर्मी चीफ के आगमन पर पूरे सतना में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। स्कूल परिसर में छात्रों और शिक्षकों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ के नारे लगाए। जनरल द्विवेदी ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी ही सफलता की कुंजी हैं।
