सनातन धर्म में भाद्रपद का महीना अत्यंत खास और पावन माना जाता है। यह महीना अपने साथ कई प्रमुख व्रत-त्योहारों का संगम लेकर आता है, जो भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं। इस माह के शुक्ल पक्ष में गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी, परिवर्तिनी एकादशी समेत कई बड़े पर्व मनाए जाते हैं, जो चारों ओर भक्तिमय वातावरण बनाते हैं।

‘सीमा पर शांति’ और संबंधों में उन्नति पर जोर

इसी कड़ी में, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जाता है। यह शुभ अवसर भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धाभाव से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे उन्हें महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है, लेकिन भाद्रपद माह के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व है। इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में शिव जी की पूजा करने से भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं।

यह माह हमें भगवान गणेश, राधा रानी और भगवान शिव जैसे देवों की पूजा करने का अवसर देता है, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं।

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Alok Kumar Srivastava
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