पुणे: पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट मामले में पुणे पुलिस को JJB यानी किशोर न्याय बोर्ड से झटका लगा है. मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पुणे पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नाबालिग आरोपी को एडल्ट की तरह ट्रीट करने की मांग की थी. यानी किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी को बालिग की तरह ही समझते हुए केस चलाने की अनुमति नहीं दी है.

पुणे सिटी पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड में एक आवेदन दायर किया था कि इस मामले में किशोर अपराधी पर एक वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए. पुणे पुलिस की ओर से दायर की गई याचिका को किशोर न्याय बोर्ड ने खारिज कर दिया.

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मई 2024 का है मामला 

ये 13 महीने से ज्‍यादा पुरानी घटना का मामला है, जब 19 मई 2024 की रात पुणे के कोरेगांव पार्क इलाके में एक तेज रफ्तार पोर्श (Porsche) कार ने बाइक सवार दो इंजीनियरों को टक्कर मार दी थी. दोनों इंजीनियर (अश्विनी कोस्टा और अनीश अवधिया) की मौके पर ही मौत हो गई. हादसे के वक्त कार चला रहा व्यक्ति महज 17 साल 8 महीने का था और शराब के नशे में था. 18 साल से महज 4 महीने उम्र कम होने के चलते पुणे पुलिस ने उसे बालिग की तरह ट्रीट करने की मांग की थी.

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हादसे के बाद क्या हुआ था?

पुलिस ने शुरुआत में महज लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया था, लेकिन जब ये बात सामने आई कि आरोपी शराब के नशे में था तो मामला गंभीर हो गया. शुरुआत में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने आरोपी को महज़ 14 घंटे के अंदर बेल दे दी थी, जिसमें 100 शब्दों का निबंध ,समाज सेवा’ और ‘पढ़ाई पर ध्यान देने’ जैसी शर्तें थीं. इस पर देशभर में नाराजगी और आक्रोश फूटा था.

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Alok Kumar Srivastava
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