नई दिल्ली। राज्यसभा में भाजपा सांसद भीम सिंह द्वारा पेश किए गए प्राइवेट मेंबर बिल ने देश की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। इस बिल में संविधान की प्रस्तावना से ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द हटाने की मांग की गई है। सांसद सिंह का दावा है कि ये शब्द आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन (1976) के तहत बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जोड़े गए थे और अब इन्हें हटाकर संविधान को उसके मूल रूप में लौटाना आवश्यक है।

भीम सिंह ने कहा कि संविधान की संरचना ही देश को धर्मनिरपेक्ष बनाती है, इसलिए अलग से ‘सेक्युलर’ शब्द जोड़ना जरूरी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि ‘सोशलिस्ट’ शब्द तत्कालीन सोवियत संघ को खुश करने और राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए जोड़ा गया था। उनके अनुसार, शब्द हटाने से किसी मौलिक अधिकार या संवैधानिक प्रावधान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

भारत मजबूत स्थिति में, 38.2 ओवर में 1 विकेट पर 246 रन—जायसवाल का शतक

सांसद ने विपक्ष के संभावित विरोध पर कहा कि यह कदम संविधान पर हमला नहीं बल्कि इसे उसके असली रूप में वापस लाने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 1976 से पहले भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं था और क्या नेहरू या लाल बहादुर शास्त्री की सरकार सांप्रदायिक थी?

हालांकि प्राइवेट मेंबर बिलों के पास होने की संभावना कम रहती है, लेकिन भीम सिंह का मानना है कि इस कदम से सरकार और जनता दोनों का ध्यान संविधान की प्रस्तावना और उसमें जोड़े गए शब्दों की वैधता पर जाएगा।

Share.

Alok Kumar Srivastava
Chief Editor

Address :    104, Bharsar, District – Ghazipur, Uttar Pradesh – 233300

Mobile        +91-98388 99305
Email        prabhatdarshan25@gmail.com

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  

© 2025 prabhatdarshan.com 

Exit mobile version