Sankashti Chaturthi 2025 Puja Rituals नई दिल्ली । देशभर में आज अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि संकष्टी व्रत करने से सभी दुख और संकट दूर होते हैं, और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

संकष्टी व्रत की पूजा विधि (Sankashti Chaturthi 2025 Puja Vidhi)

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल कपड़े पहनें।

  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन सात्विकता का पालन करें।

  • शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

  • एक वेदी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

  • गणेश जी का पंचामृत से अभिषेक कराएं।

  • उन्हें लाल चंदन, लाल फूल और दूर्वा अर्पित करें।

  • संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।

  • रात में जब चंद्रमा दिखाई दे, तो उन्हें जल, दूध, चंदन और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें।

  • पूजा में हुई सभी भूल-चूक के लिए माफी प्रार्थना करें।

भोग सामग्री (Sankashti Chaturthi 2025 Bhog List)

  • मोदक/लड्डू – भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय हैं। इसके अलावा बेसन या तिल के लड्डू भी भोग के रूप में अर्पित किए जा सकते हैं।

  • फल – केला और मौसमी फल।

पूजन मंत्र (Puja Mantra)

पूजा के दौरान मंत्र का उच्चारण करें:
ॐ गं गणपतये नमः

दान का महत्व (Sankashti Chaturthi 2025 Daan)

इस दिन तिल, गुड़ और वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि तिल का दान करने से शनि दोष और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

संकष्टी व्रत में बचें इन गलतियों से (Sankashti Chaturthi 2025 Donts)

  • तुलसी का प्रयोग पूजा में न करें।

  • व्रत में साधारण नमक या चावल का प्रयोग न करें, केवल फरहारी का उपयोग करें।

  • इस दिन तामसिक भोजन और चीजों से पूरी तरह बचें।

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।

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Alok Kumar Srivastava
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