शहर से लेकर देहात तक लगाए गए स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के गले की फांस बनते जा रहे हैं। बिजली निगम ने इन मीटरों को पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लगाया था, लेकिन यह योजना अब तकनीकी खामियों और प्रणालीगत दिक्कतों से घिर गई है।
कई इलाकों में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। रोजाना मीटर रिचार्ज, बैलेंस कटने और रीडिंग में गड़बड़ी जैसी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर लगने के बाद तीन-चार महीने से बिल नहीं आया, जबकि जिनके बिल आए हैं, वे अचानक कई गुना बढ़े हुए हैं।
उपभोक्ता जब अपनी शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचते हैं, तो उन्हें तकनीकी खामी या सर्वर समस्या बताकर लौटा दिया जाता है। ग्रामीण इलाकों में तो कई जगह मीटर चलते ही नहीं, जिससे रीडिंग और भुगतान दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे स्मार्ट मीटर व्यवस्था का विरोध करने को मजबूर होंगे। वहीं, बिजली निगम अधिकारियों का कहना है कि “सिस्टम अपग्रेडेशन की प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही सभी तकनीकी दिक्कतें दूर कर दी जाएंगी।”

