नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना पर “बुलडोजर चला दिया है” और इसे धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है।
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य गांवों की जरूरतों के अनुसार लोगों को रोजगार देना था, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में यह भावना खत्म होती जा रही है। उनके अनुसार अब यह तय किया जा रहा है कि किसे, कितना और कहां काम मिलेगा—और ये फैसले जमीनी हकीकत को समझे बिना दिल्ली में बैठकर किए जा रहे हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कटौती, भुगतान में देरी और प्रशासनिक नियंत्रण के कारण गरीब और ग्रामीण मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसे कमजोर करना करोड़ों लोगों की आजीविका पर हमला है।
कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि मनरेगा को पर्याप्त फंड दिया जाए, मजदूरी समय पर दी जाए और स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय करने का अधिकार राज्यों व पंचायतों को मिले।
वहीं, सरकार की ओर से पहले ही यह कहा जाता रहा है कि मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सुधार किए गए हैं।

