सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर एक यहूदी त्योहार की तैयारी के दौरान रविवार को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस गोलीबारी में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे सख्त बंदूक कानून वाले देश में बीते करीब तीन दशकों में यह सबसे घातक गोलीबारी की घटना मानी जा रही है।
पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि हमला पिता-पुत्र की जोड़ी ने अंजाम दिया। न्यू साउथ वेल्स पुलिस आयुक्त माल लैन्योन के अनुसार, 50 वर्षीय साजिद अकरम को मौके पर ही पुलिस ने मार गिराया, जबकि उसका 24 वर्षीय बेटा नवीद अकरम गंभीर रूप से घायल हुआ है और अस्पताल में उसका इलाज जारी है।
पाकिस्तानी नागरिक थे हमलावर
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच से जुड़े अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दोनों आरोपी पाकिस्तानी नागरिक थे। साजिद अकरम के न्यू साउथ वेल्स ड्राइविंग लाइसेंस की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। सुरक्षा एजेंसियां उनके कट्टरपंथी संपर्कों और पृष्ठभूमि की जांच कर रही हैं।
10 मिनट तक चली अंधाधुंध गोलीबारी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बोंडी बीच रविवार को पर्यटकों और स्थानीय लोगों से भरा हुआ था। हमलावरों ने करीब 10 मिनट तक लगातार गोलियां चलाईं, जिससे समुद्र तट और आसपास की सड़कों पर भगदड़ मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
पुलिस ने बताया कि जिस हनुक्का कार्यक्रम को निशाना बनाया गया, उसमें करीब 1,000 लोग शामिल होने वाले थे। यह कार्यक्रम समुद्र तट के पास एक छोटे पार्क में आयोजित किया जा रहा था।
“मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता” – हमलावर की मां
घटना के बाद पुलिस ने नवीद अकरम की मां वेरेना से भी पूछताछ की। उन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए कहा,
“मेरा बेटा ऐसा हमला कर ही नहीं सकता। वह बहुत अच्छा लड़का है, हर कोई मेरे बेटे जैसा बेटा चाहेगा।”
वेरेना ने बताया कि नवीद ने घटना से कुछ घंटे पहले ही उनसे फोन पर बात की थी और कहा था कि वह तैराकी और स्कूबा डाइविंग करके लौटा है। उन्होंने यह भी बताया कि नवीद हाल ही में राजमिस्त्री की नौकरी खो चुका था।
जांच एजेंसियां अलर्ट
घटना के बाद पूरे सिडनी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। आतंकी एंगल को ध्यान में रखते हुए ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जांच में जुटी हैं। यह हमला यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया या नहीं, इसकी भी गहन जांच की जा रही है।
