नई दिल्ली — देशभर में चलती बसों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। परिवहन मंत्रालय ने साफ संकेत दिए हैं कि अब किसी भी बस को रजिस्ट्रेशन या फिटनेस सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाएगा, जब वह “बस बॉडी कोड (Bus Body Code)” के दिशानिर्देशों का पालन करेगी।
सितंबर 2025 से लागू हुआ था नया कोड
बस बॉडी कोड सितंबर 2025 में लागू किया गया था। इस कोड में बसों की डिजाइन, सुरक्षा उपकरणों, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन दरवाजों और सीटिंग स्ट्रक्चर से जुड़े मानक तय किए गए हैं। हालांकि कई स्लिपर और लंबी दूरी की बसें अभी भी इस दायरे में नहीं आ पाई हैं।
आरटीओ ने शुरू की सख्ती
सूत्रों के मुताबिक, अब आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) किसी भी बस का रजिस्ट्रेशन या फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करेगा कि बस पूरी तरह से बस बॉडी कोड के अनुरूप है या नहीं। जो बसें इन मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उन्हें सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं मिलेगी।
आग की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में कई राज्यों में चलती बसों में आग लगने की घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं। ज्यादातर मामलों में बसों में आपातकालीन निकास या अग्निशमन उपकरण नहीं थे। विशेषज्ञों का कहना है कि बस बॉडी कोड का पालन न होने से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है।
क्या हैं नए नियम
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हर बस में ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य।
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दो आपातकालीन दरवाजे और पर्याप्त निकास स्थान अनिवार्य।
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फायर-रेसिस्टेंट मटीरियल से बस के अंदरूनी हिस्से तैयार करने होंगे।
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बस के इलेक्ट्रिकल सिस्टम के लिए मानकीकृत वायरिंग और इंसुलेशन जरूरी।
परिवहन मंत्रालय का बयान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यात्रियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। किसी भी बस को अब बिना मानकों के सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्यों को इस दिशा में निगरानी और सख्ती बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।”
बस ऑपरेटरों में हलचल
सरकार के इस कदम से निजी बस ऑपरेटरों में हलचल मच गई है। कई ऑपरेटरों का कहना है कि पुराने वाहनों को नए मानकों पर अपग्रेड करने में लागत बढ़ेगी, जबकि मंत्रालय का तर्क है कि “सुरक्षा पर समझौता नहीं किया जा सकता।
