महिलाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा खुलासा करते हुए, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में मुंबई और नागालैंड की राजधानी कोहिमा महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर हैं। वहीं दिल्ली और बिहार की राजधानी पटना सबसे कम सुरक्षित शहरों की सूची में शामिल हैं।

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यह  31 शहरों में 12,770 महिलाओं की राय पर आधारित है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उनकी धारणा और वास्तविक अनुभवों को समझना है।

सबसे सुरक्षित और सबसे कम सुरक्षित शहर

  • सबसे सुरक्षित शहर: कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर, और मुंबई।
  • सबसे कम सुरक्षित शहर: पटना, जयपुर, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर, और रांची।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • सुरक्षा की धारणा: सर्वे में शामिल 60% महिलाओं ने कहा कि वे अपने शहर में सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन 40% महिलाओं ने खुद को “कम सुरक्षित” या “बिल्कुल असुरक्षित” महसूस करने की बात कही।
  • उत्पीड़न के मामले: में पाया गया कि हर 100 में से 7 महिलाओं को 2024 में सार्वजनिक जगहों पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
  • शिकायत न करना: सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि हर तीन में से केवल एक महिला ही उत्पीड़न की करती है, जिसका मतलब है कि दो-तिहाई मामले पुलिस तक नहीं पहुंच पाते।

सुरक्षा रैंकिंग के कारण

कोहिमा और मुंबई जैसे शहरों की बेहतर रैंकिंग के पीछे मजबूत लैंगिक समानता, प्रभावी पुलिस व्यवस्था और महिला-अनुकूल बुनियादी ढांचा जैसे कारक हैं। इसके विपरीत, पटना और दिल्ली जैसे शहरों में खराब बुनियादी ढांचा, पितृसत्तात्मक मानदंड और कमजोर संस्थागत प्रतिक्रिया महिलाओं की असुरक्षा को बढ़ाती है।

से यह साबित होता है कि सिर्फ अपराध के आंकड़े देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक शहर की सुरक्षा को महिलाओं के वास्तविक अनुभवों और उनकी धारणा के आधार पर मापना जरूरी है।

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Alok Kumar Srivastava
Chief Editor

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