नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में रोजगार की अनिश्चितता से जूझ रहे परिवारों के लिए अब बड़ा राहत भरा कानून लागू हो गया है। भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) – जी-रामजी अधिनियम के तहत पहली बार बेरोजगारी भत्ते को केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि एक बाध्यकारी अधिकार के रूप में परिभाषित किया गया है।

कानून के अनुसार, किसी भी पात्र परिवार का वयस्क सदस्य जब योजना के तहत रोजगार की मांग करता है, तो राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी बन जाती है कि उसे 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा में रोजगार नहीं मिलता है, तो आवेदक स्वतः बेरोजगारी भत्ते का हकदार बन जाता है। इस भत्ते का भुगतान राज्य सरकार को करना अनिवार्य होगा और इसे रोकने या टालने की कोई गुंजाइश नहीं है।

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भत्ते की दर तय करने का अधिकार भले ही राज्य सरकारों को दिया गया है, लेकिन कानून ने इसमें मनमानी की संभावना को समाप्त कर दिया है। अधिनियम में न्यूनतम सीमा स्पष्ट की गई है। वित्तीय वर्ष के पहले 30 दिनों के लिए बेरोजगारी भत्ता संबंधित क्षेत्र की निर्धारित मजदूरी का कम से कम एक-चौथाई होना अनिवार्य है, जबकि बाद की अवधि में यह मजदूरी दर का आधा या उससे अधिक होना जरूरी है।

कानून में यह भी साफ किया गया है कि किन परिस्थितियों में राज्य सरकार की जिम्मेदारी समाप्त हो जाएगी। यदि ग्राम पंचायत या सक्षम प्राधिकारी आवेदक को काम पर रिपोर्ट करने का निर्देश देता है, या परिवार का कोई वयस्क सदस्य रोजगार प्राप्त कर लेता है, तो उस अवधि का भत्ता नहीं दिया जाएगा। इसी तरह, यदि रोजगार की अवधि समाप्त हो जाए या प्रस्तावित काम को स्वीकार करने से इंकार किया जाए, तो भी भत्ता देय नहीं होगा।

अधिनियम यह भी स्पष्ट करता है कि किसी वित्तीय वर्ष में यदि परिवार के वयस्क सदस्यों को कम से कम 125 दिन का रोजगार मिल चुका है, तो उसके बाद बेरोजगारी भत्ते का दावा नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, मजदूरी और बेरोजगारी भत्ता मिलाकर यदि कुल राशि 125 दिन की मजदूरी के बराबर हो चुकी है, तो अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जी-रामजी अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक न्याय का भी मजबूत आधार प्रदान करेगा। इस कानून से ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी और बेरोजगारी की स्थिति में वित्तीय राहत मिल सकेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में जीवन स्तर में सुधार होगा।

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Alok Kumar Srivastava
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