नई दिल्ली। खेती को सस्ता, आसान और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश में पहली बार इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए भारतीय मानक (IS 19262:2025) जारी किया गया है। इससे अब किसानों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि वे जो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीद रहे हैं, वह खेत में कितना काम का और कितना सुरक्षित है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में इस मानक का विमोचन किया। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने तैयार किया है। नए मानक के लागू होने से इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की शक्ति, कार्यक्षमता और सुरक्षा का परीक्षण तय प्रक्रिया के तहत होगा। सभी कंपनियों के ट्रैक्टर को एक ही कसौटी पर परखा जाएगा, जिससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में भ्रांतियों का अंत होगा।
मानक में पहली बार स्पष्ट किया गया है कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की पीटीओ पावर, ट्रॉली या हल खींचने की क्षमता और बेल्ट-पुली से जुड़े कार्यों का प्रदर्शन कैसे मापा जाएगा। इसके साथ ही ट्रैक्टर के पुर्जों की विश्वसनीयता, बैटरी, मोटर और अन्य हिस्सों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। इससे खराब या अधकचरे उत्पादों को रोकना संभव होगा।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे का कहना है कि इस पहल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को तेजी से अपनाया जाएगा। कंपनियां बेहतर, सुरक्षित और भरोसेमंद मशीनें बनाने के लिए आगे आएंगी।
किसानों के लिए फायदे:
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इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बिजली से चलते हैं, जिससे डीजल खर्च में भारी बचत होगी।
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सोलर पैनल या सस्ती बिजली से खेती की लागत और कम हो सकती है।
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ट्रैक्टर शोर कम करते हैं और धुआं नहीं छोड़ते, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलता है।
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रखरखाव आसान है, पुर्जों की संख्या कम होने से खराबी और मरम्मत खर्च घटता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय खेती में बड़ा बदलाव लाएगी और लंबे समय में किसानों की आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।
इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टर अब केवल तकनीकी नवाचार नहीं रहेंगे, बल्कि किसानों के लिए भरोसेमंद और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरेंगे, जो खेती को आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी दृष्टि से मजबूत बनाएंगे।
