Money laundering नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम आदेश में कहा कि जांच एजेंसियां किसी भी वकील को नोटिस या समन भेजने से पहले पुलिस अधीक्षक (SP) की लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य है। इस कदम का उद्देश्य वकील और मुवक्किल के बीच पेशेवर गोपनीयता के अधिकार की रक्षा करना है।
अधिकार और जांच के बीच संतुलन
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उन्होंने वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता और जांच की जरूरत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वकील-मुवक्किल गोपनीयता कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसे बिना उचित अनुमति के भंग नहीं किया जा सकता।
ED और मनी लॉन्ड्रिंग केस
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में वकीलों को नोटिस भेजा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम को रोकते हुए निर्देश दिया कि जांच एजेंसियों को SP की लिखित मंजूरी लेनी होगी।
कानूनी और सामाजिक महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश कानूनी प्रणाली में वकीलों की सुरक्षा और मुवक्किल की गोपनीयता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, यह जांच एजेंसियों और कानूनी पेशेवरों के बीच संतुलन बनाए रखने का भी संकेत देता है।
