ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब सोमवार को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दो गंभीर आरोपों में मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने उन्हें हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने का दोषी पाया है। यह मामला जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई कई हत्याओं से जुड़ा है।
छात्र आंदोलन हत्याकांड की मास्टरमाइंड करार
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि जुलाई 2024 में भड़के छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए सरकारी मशीनरी का गलत उपयोग किया गया। अदालत ने माना कि शेख हसीना ने आंदोलनकारियों पर कार्रवाई का आदेश जारी किया, जिसके परिणामस्वरूप कई युवाओं की हत्या हुई।
फैसले की घोषणा के बाद कोर्ट रूम तालियों से गूंज उठा।
पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी फांसी की सजा
इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी 12 छात्रों की हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट के अनुसार, उन्होंने सीधे तौर पर सुरक्षा बलों को गोली चलाने और कार्रवाई तेज करने के आदेश दिए थे।
पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल की सजा
मामले के तीसरे आरोपी और पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल की जेल की सजा दी गई है। ममून पहले से ही हिरासत में हैं और मामले में सरकारी गवाह बन चुके हैं। अदालत ने उनके सहयोग को ध्यान में रखते हुए कम अवधि की सजा दी।
