पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Chunav 2025) में महागठबंधन को मिली करारी हार के चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसके घटक दल अभी भी गहरे सन्नाटे में हैं।
न तो राजद नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, और न ही कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा हार पर कोई बयान देने के लिए तैयार दिख रहा है।
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विश्लेषकों का मानना है कि यह खामोशी केवल परिणामों के सदमे का संकेत नहीं है, बल्कि महागठबंधन के भीतर असंतोष, आत्ममंथन और नेतृत्व संकट का भी प्रतीक है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महागठबंधन को अब भीतर से अपनी रणनीति और नेतृत्व ढांचे का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। चुनाव में मिली हार ने गठबंधन के संकट और कमजोरियों को उजागर किया है।
इस हार के बाद महागठबंधन के नेताओं के बीच भविष्य की रणनीति और सीटों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।
