सावन में कांवड़ियों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। कांवड़ यात्रा पर निकलने वाले QR कोड के जरिए कई तरह की जानकारी ले सकेंगे। उन्हें बस अपने स्मार्टफोन से इसे स्कैन करना होगा। कांवड़ यात्रा पर निकलने वाले कांवड़ियों के साथ-साथ आम लोग भी अपने फोन में डायवर्ट रूट की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, ताकि उन्हें यात्रा में किसी तरह की दिक्कत न हो।

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कैसे करेगा काम?

कांवड़ यात्रा पर निकले कांवड़ियों के साथ-साथ अन्य लोग अपने फोन में रास्ते में जगह-जगह लगे QR कोड को स्कैन करके रूट डायवर्जन की जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए उनके पास स्मार्टफोन होना चाहिए। कावंड यात्रा वाले मार्ग पर ये QR कोड्स लगाए गए हैं।

  • कांवड़ियों को रास्ते में दिखने वाले QR कोड्स को स्कैन करना होगा।
  • कोड स्कैन करने से पहले ये ध्यान दें कि फोन के कैमरे का लेंस साफ रहना चाहिए।
  • साथ ही, मोबाइल में इंटरनेट का होना जरूरी है।
  • जैसे ही QR कोड स्कैन करेंगे, आपको डायवर्ट रूट्स की जानकारी मिल जाएगी।

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कांवड़ियों वाले मार्ग पर जाने से बचने के लिए आम लोग भी इन QR कोड्स को स्कैन करके डायवर्ट रूट्स की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, ऐसे अल्टर्नेटिव रूट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां से कांवड़िये न जा रहे हों। ऐसा करने से वो लगने वाले जाम से भी बच सकते हैं। दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरिद्वार तक हर साल सावन में कांवड़ यात्रा निकलती है। इस दौरान कई रास्तों को कांवड़ियों के लिए डायवर्ट किया जाता है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इन रास्तों पर रोजाना सफर करने वाले लोगों को रूट्स की जानकारी मिलेगी और वो जाम में फंसने से बच सकते हैं।

 

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पिछले साल 4 करोड़ कांवड़ियों ने की थी यात्रा

दिल्ली पुलिस ने कांवड़ियों से अपील की है कि वे निर्धारित रास्तों का ही उपयोग करें। एडिशनल कमिश्नर दिनेश कुमार गुप्ता ने कहा, ‘हमने कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं। कृपया निर्धारित मार्गों का पालन करें।’ बता दें कि सावन के महीने में 23 जुलाई को सावन की शिवरात्रि मनाई जाएगी। इसके बाद भी 9 अगस्त तक श्रद्धालु गंगाजल चढ़ाते रहेंगे। पिछले साल 4 करोड़ से अधिक कांवड़ियों ने इस यात्रा में हिस्सा लिया था, और इस साल यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। यही वजह है कि प्रशासन ने पहले से ज्यादा पुख्ता तैयारियां की हैं।

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Alok Kumar Srivastava
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